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ऋषियों ने सर्वश्रेष्ठ और सर्वप्रथम किया जाने वाला धर्म गोसेवा को ही बताया है.

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Lord Shiva is always in the company of a Bull

Lord Krishna is always in the company of cow

It has a deeper meaning & message to us!
Nandi is a symbol of a life energy, manifestation power -vitality, strength, faith and consistency

Cows & Bulls being slaughtered is a sign of demonic civilization! We have to change this trend,protecting Cows & Bulls means keeping this planet safe & conserved for our children! It's the greatest service to Mankind!



जीवन का उत्तम कार्य क्या है और क्या नित्य करणीय है ? इसके विषय में भगवान शिव गौसेवा करने का परामर्श देते हैं | उनका कहना है कि गौएँ परम सौभाग्यशालिनी और अत्यन्त पवित्र हैं, ये तीनों लोकों को धारण करनेवाली हैं | पूर्वकाल में सृष्टि की रचना से पूर्व ब्रहाजी ने यह विचार किया कि मैं सृष्टि रचने तो जा रहा हूँ, किन्तु उस सृष्टि का भरण-पोषण कौन करेगा, प्राणियों का जीवन किसके आधार पर चलेगा ? तब उन्होंने सर्वप्रथम गौ की सृष्टि की, इसलिये वे सबकी माताएँ मानी गई हैं | भगवान शंकर देवी पार्वती को बताते हैं - हे देवि ! गौएँ सम्पूर्ण जगत में ज्येष्ठ हैं | वे लोगों को जीविका देने के कार्य में प्रवृत हुई हैं | वे सौम्य, पुण्यमयी, कामनाओं की पूर्ती करनेवाली तथा प्राणदायिनी हैं, इसलिये वे पूजनीय हैं, सेवा के योग्य हैं | ऐसी गौओं के मल-मूत्र से कभी उद्विग्न नहीं होना चाहिये और उनका मांस कभी नहीं खाना चाहिये | सदा गौओं का भक्त होना चाहिये और निरन्तर उनकी सेवा करनी चाहिये | भगवान शिव कहते हैं - उत्तम गोशालाओं का निर्माण करने वाला तथा गायों के भोजन आदि की व्यवस्था करने वाला उत्तम कुल में जन्म लेता है और आरोग्य सम्पन्न रहता है |


ईश्वर को खोजने वाले अपनी खोज में सारी आयु बिता देते हैं ईश्वर दयालु हैं वह अपने साधक को निराश नहीं करते लेकिन मिलते उन्हीं को हैं जो गौभक्त होते हैं गौसेवक होते हैं या गौरक्षक होते हैं सारी उमर खोज में बिता देने से अच्छा है किसी गौशाले में जाकर ईश्वर से मिल लिया जाय ईश्वर गौवंश के इर्द गिर्द ही रहते हैं यह शाश्वत सत्य है हृदय में गौवंश को रखने वाला ही हरि का दर्शन पा सकता है

यह कठोर सत्य है....गौवंश की जय हो ! ॐ


गोमूत्रं गोमयं दुन्धं गोधूलिं गोष्ठगोष्पदम्।

पक्कसस्यान्वितं क्षेत्रं द्ष्टा पुण्यं लभेद्ध्रवम्।। More




स्वादु शीतं मृदु स्निग्धं बहलं श्लक्ष्णपिच्छिलम्|
गुरु मन्दं प्रसन्नं च गव्यं दशगुणं पयः||२१७||
तदेवङ्गुणमेवौजः सामान्यादभिवर्धयेत्|
प्रवरं जीवनीयानां क्षीरमुक्तं रसायनम्||२१८||

संत वाणी में कहा गया है की यदि सोने के सिक्के देकर भी मिले तो गाय का दूध पियो |

उदाहरण:- धर्मराज युधिष्टर से जब यक्ष ने प्रश्न किया था की पृथ्वी पर अमृत क्या है?

तब धर्मराज युधिष्टर ने कहा की गोमाता का दूध ही पृथ्वी पर अमृत है |


गाय से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी।

  • गौ माता जीस जगह खडी रहकर आनंद पुर्वक चैन की सांस लेती है। वहा वास्तु दोष समाप्त हो जाते है।
  • गौ माता मे तैतीस कोटी देवी देवताओं का वास है।
  • गौ माता जीस जगह खुशी से रभांने से देवी देवता पुष्प वर्षा करते है।
  • गौ माता के गले मे घंटी जरूर बांधे गाय के गले मे घंटी बजने से गौ आरती होती है।
  • जो व्यक्ति गौ माता की सेवा पुजा करता है। उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गौ माता हर लेती है।
  • गौ माता के खुर्र मे नागदेवता का वास होता है। जहा गौ माता विचरण करती है। उस जगह साप बिच्छू नही आते है।
  • गौ माता के गोबर मे लक्ष्मी जी का वास होता है
  • गौ माता के मुत्र मे गंगाजी का वास होता है।
  • गौ माता के गोबर से बने उपलो का रोजाना घर दुकान मंदिर परिसरो पर धुप करने से वातावरण शुद्ध होता सकारात्मक ऊर्जा मिलती है
  • गौ माता के ऐक आख मे सुर्य व दुसरी आख मे चन्द्र देव का वास होता है।
  • गाय इस धरती पर साक्षात देवता है।
  • गौ माता अन्नपूर्णा देवी है कामधेनु है। मनोकामना पूर्ण करने वाली है।
  • गौ माता के दुध मे सुवर्ण तत्व पाया जाता है जो रोगो की क्षमता को कम करता है।
  • गौ माता की पुछ मे हनुमानजी का वास होता है। कीसी व्यक्ति को बुरी नजर हो जाये तो गौ माता की पुछ से झाडा लगाने से नजर उतर जाती है।
  • गौ माता की पीठ पर ऐक उभरा हुआ कुबंड होता है। उस कुबंड मे सुर्य केतु नाडी होती है। रोजाना सुबह आधा घंटा गौ माता की कुबंड हाथ फेरने से रोगो का नाश होता है
  • गौ माता का दुध अमृत है
  • गौ माता धर्म की धुरी है।
  • गौ माता के बिना धर्म कि कलपना नही कि जा सकती गौ माता जगत जननी है।
  • गौ माता पृथ्वी का रूप है
  • गौ माता सर्वो देवमयी सर्वोवेदमयी है। गौ माता के बिना देवो वेदो की पुजा अधुरी है।
  • ऐक गौ माता को चारा खिलाने से तैतीस कोटी देवीदेवताओ को भोग लग जाता है।
  • गौ माता से ही मनुष्यो के गौत्र की स्थापना हुई है।
  • गौ माता चौदह रत्नो मे ऐक रत्न है।
  • गौ माता साक्षात मा भवानी का रूप है।
  • गौ माता के पंचगव्य के बिना पुजा पाठ हवन सफल नही होते है।
  • गौ माता के दुध घी मख्खन दही गोबर गोमुत्र से बने पंचगव्य हजारो रोगो की दवा है। इसके सेवन से असाध्य रोग मीट जाते है
  • गौ माता को घर पर रखकर सेवा करने वाला सुखी आध्यात्मिक जीवन जीता है। उनकी अकाल मृत्यु नही होती है।
  • तन मन धन से जो मनुष्य गौ सेवा करता है। वो वैतरणी गौ माता की पुछ पकड कर पार करता है। उन्हें गौलोकधाम मे वास मीलता है
  • गौ माता के गोबर से इधंन तैयार होता है।
  • गौ माता सभी देवी देवताओं मनुष्यो की आराध्य है इष्ट देव है।
  • साकेत स्वर्ग इन्द्र लोक से भी उच्चा गौ लोक धाम है।
  • गौ माता के बिना संसार की रचना अधुरी है।
  • गौ माता मे दिव्य शक्तिया होने से संसार का संतुलन बना रहता है।
  • गाय माता के गौवंशो से भुमी को जोत कर की गई खेती सर्वश्रेष्ट खेती होती है
  • गौ माता जीवन भर दुध पिलाने वाली माता है। गौ माता को जननी से भी उच्चा दर्जा दिया गया है।
  • जंहा गौ माता निवास करती है। वह स्थान तिर्थ धाम बन जाता है।
  • गौ माता कि सेवा परिक्रमा करने से सभी तिर्थो के पुण्यो का लाभ मीलता है।
  • जीस व्यक्ति के भाग्य की रेखा सोई हुई हो तो वो व्यक्ति अपनी हथेली मे गुड को रखकर गौ माता को जीभ से चटाये गौ माता की जीभ
  • हथेली पर रखे गुड को चाटने से व्यक्ति की सोई हुई भाग्य रेखा खुल जाती है।
  • गौ माता के चारो चरणो के बीच से निकल कर परिक्रमा करने से इंसान भय मुक्त हो जाता है।
  • गाय माता आनंद पुर्वक सासें लेती है । छोडती है। वहा से नकारात्मक ऊर्जा भाग जाती है। सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। वातावरण शुद्ध होता है
  • गौ माता के गर्भ से ही महान विद्वान धर्म रक्षक गौ कर्ण जी महाराज पैदा हुए थे
  • गौ माता की सेवा के लिए ही इस धरा पर देवी देवताओं ने अवतार लीये है।
  • जब गौ माता बछडे को जन्म देती तब पहला दुध बांज स्त्री को पिलाने से उनका बांजपन मीट जाता है।
  • स्वस्थ गौ माता का गौ मुत्र को रोजाना दो तोला सात पट कपडे मे छानकर सेवन करने से सारे रोग मीट जाते है
  • गौ माता वात्सल्य भरी निगाहों से जीसे भी देखती है। उनके उपर गौकृपा हो जाती है
  • गाय इस संसार का प्राण है।
  • काली गाय की पुजा करने से नोह ग्रह शांत रहते है। जो मन पुर्वक धर्म के साथ गौ पुजन करता है। उनको शत्रु दोषो से छुटकारा मीलता है।
  • गाय धार्मिक आर्थिक व सांस्कृतिक आध्यात्मिक दृष्टि से सर्वगुण संपन्न है।
  • गाय ऐक चलता फीरता मंदिर है। हमारे सनातन धर्म में तैतिस कोटी देवी देवता है। हम रोजाना तैतीस कोटी देवी देवताओं के मंदिर जा कर उनके दर्शन नही कर सकते पर गौ माता के दर्शन से सभी देवी देवताओं के दर्शन हो जाते है।
  • कोई भी शुभ कार्य अटका हुआ हो बार बार प्रयत्न करने पर भी सफन नही हो रहा हो तो गौ माता के कान मे कहीये रूका हुआ काम बन जायेगा
  • जो व्यक्ति मोक्ष गौ लोक धाम चाहता हो उसे गौ व्रती बनना चाहिए ।
    गौ माता सर्व सुखों की दातार है।


  • गाय के बारे में विभिन्न महापुरूषो के वचन


    • प्रसिद् मुस्लिम संत रसखान के अनुसार “यदि पशु के रूप में मेरा जन्म हो तो मैं बाबा नंद की गायों के बीच में जन्म लूं”

  • • पं. मदन मोहन मालवीय जी की अंतिम इच्छा “भारतीय संविधान में सबसे पहली धारा सम्पूर्ण गौवंश हत्या निषेध की बने”

  • ईसा मसीह “एक गाय को मरना, एक मनुष्य को मारने के समान है”
  • पंडित मदन मोहन मालवीय के अनुसार “यदि हम गायों की रक्षा करेंगे तो गाय हमारी रक्षा करेंगी”

  • स्कन्द पुराण अनुसार “गौ सर्वदेवमयी और वेद सर्वगौमय है”

  • महर्षि अरविंद के अनुसार “गौ’ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की धात्री होने के कारण कामधेनु है| इसका अनिष्ट चिंतन ही पराभव का कारण है”

    भगवान राम के पूर्वज महाराज दिलीप भी नन्दिनी की पूजा करते थे। उन्हीं की कृपा से उनका वंश उन्नति को प्राप्त हुआ। महर्षि वशिष्ट के आश्रम में भी कामधेनु उनकी समस्त आवश्यकताओं को पूर्ण करती थीं। विश्वामित्र इसी कामधेनु को प्राप्त करने के लिये वशिष्ठ पर नारायणस्त्र, ब्रह्मास्त्र व पाशुपतास्त्र का संधान किया था परंतु कामधेनु के आशीष से सभी अस्त्र-शस्त्र निर्मूल सिद्ध हुए थे।

    भगवान शिव का वाहन नंदी दक्षिणी भारत के ओंगलें नामक नस्ल का सांड था। जैन आदि तीर्थ कर भगवान ऋषभदेव का चिन्ह बैल था।

    • तुलसीदास जी के अनुसार धर्म-अर्थ, काम व मोक्ष चारों फल गाय के चार थन रूप हैं। हिन्दू शास्त्रों में व जैन आगमों में कामधेनु को स्वर्ग की गाय कहा है। गाय को ‘अवध्या’ माना है।

    • भगवान महावीर के अनुसार ‘गौ रक्षा’ बिना मानव रक्षा संभव नहीं है।

    • पैगाम्बर हजरत मोहम्मद ने कहा है की ‘गाय का दूध रसायन, घी अमृत व मांस बीमारी है तथा गाय दौलत की रानी है।

    • ईसा मसीह ने कहा है कि एक बैल को मारना एक मनुष्य को मारने के समान है।

    • स्वामी दयानंद सरस्वती ‘गौ करुणानिधि’ में कहते हैं कि ‘एक गाय अपने जीवन काल में 4,10,440 लाख मनुष्यों हेतु एक समय का भोजन जुटाती है। जबकि उसके मांस से 80 मांसाहारी केवल एक समय अपना पेट भर सकते हैं।

    • लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने कहा था कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कलम की नोक से गोहत्या पूर्ण बंद कर दी जाएगी।

    • प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने कहा था भारत में गोपालन सनातन धर्म है।

    • पूज्य देवराहा बाबा के अनुसार जब तक गौमाता का खून इस भूमि पर गिरता रहेगा, कोई भी धार्मिक व सामाजिक अनुष्ठान पूर्ण नहीं होगा। कोई भी धार्मिक व सामाजिक अनुष्ठान पूर्ण नहीं होगा।

    • स्व. जयप्रकाश नारायण ने कहा था, हमारे लिये गोहत्या बंदी अनिवार्य है। गाय के वैज्ञानिक महत्व को प्रतिपादित करने वाले अनेक शोध निष्कर्ष विज्ञान की कसौटी पर खरे उतरे हैं।

    • रूसी वैज्ञानिक शिरोविच के अनुसार गाय के दूध में रेडिया विकिरण से रक्षा करने की सर्वाधिक शक्ति होती है एवं जिन घरों में गाय के गोबर से लिपाई पुताई होती है, वे घर रेडियों विकिरण से सुरक्षित रहते हैं। गाय का दूध ह्दय रोग से बचाता है। गाय का दूध स्फर्तिदायक, आलस्यहीनता व स्मरण शक्ति बढ़ाता है। गाय व उसकी संतान के रंभने से मनुष्य की अनेक मानसिक विकृतियां व रोग स्वत: ही दूर होते हैं। मद्रास के डॉ. किंग के अनुसंधान के अनुसार गाय के गोबर में हैजे की कीटाणुओं को नष्ट करने की शक्ति होती है। टी.वी. रोगियों को गाय के बाड़े या गौशाला में रखने से, गोबर व गोमूत्र की गंध से क्षय रोग (टीवी) के कीटाणु मर जाते हैं।

    • एक तोला गाय के घी से यज्ञ करने पर एक टन आक्सीजन (प्राणवायु) बनती है। रूस में प्रकाशित शोध जानकारी के अनुसार कत्लखानों से भूंकप की संभावनाएं बढ़ती हैं। शारीरिक रूप से गाय की रीड़ में सूर्य केतु नाड़ी होती हैं जो सूर्य के प्रकाश में जाग्रत होकर पीले रंग का केरोटिन तत्व छोड़ती है। यह तत्व मिला दूध सर्व रोग नाशक, सर्व विष नाशक होता है।
    गाय के घी को चावल से साथ मिलाकर जलाने से अत्यंत महत्वपूर्ण गैस जैसे इथीलीन आक्साइड गैस जीवाणु रोधक होने के कारण आप्रेशन थियेटर से लेकर जीवन रक्षक औषधि बनाने के काम आती है।

    • वैज्ञानिक प्रोपलीन आक्साइड गैस कृत्रिम वर्षा का आधार मानते हैं। इसलिये यज्ञ करना पाखंड नहीं अपितु पूर्ण वैज्ञानिक होते हैं। भारतीय गौवंश के मूत्र व गोबर से तैयार लगभग 32 औषधियों उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र व राजस्थान आदि सरकारों से मान्यता प्राप्त हैं।

    • गाय के गोमूत्र में तांबा होता है। जो मनुष्य के शरीर में पहुंचकर स्वर्ण में परिवर्तन हो जाता है। व स्वर्ण में सर्व रोगनाशक शक्ति होती है। गोमूत्र में अनेक रसायन होते हैं। जैसे नाइट्रोजन कार्बोलिक एसिड, दूध देती गाय के मूत्र में लैक्टोज सल्फर, अमोनिया गैस, कापर, पौटेशियम, यूरिया, साल्ट तथा अन्य कई क्षार व आरोग्यकारी अमल होते हैं।

    • गाय के गोबर में 16 प्रकार के उपयोगी खनिज पाये जातें हैं। गोमूत्र में आक, नीम व तुलसी आदि उबालकर, कई गुना पानी में मिलाकर बढ़िया कीट नियंत्रण बनते हैं।


Cow is considered most sacred and useful creature in india from times immemorial. Even Yug Purush Bhagwan Shri Krishan used to rear cows & our great kings used to donate cows to brahmins and saints to honour them in appreciation of their services. Every saints and seths felt honoured to reserve space near their dwelling for Gaushala. There is no need to elaborate the usefulness of the cow now & then and that is why the cow is called Gomata and used to worship by all. The tenth Guru Gobind Singh Ji Maharaj was also the staunch devotee of Lord Krishna and the great lover of the Cow. Now with the advent of “SANKRA NASAL” Cow in foreign countries and widely adopted by lndian, Deshi Cow has lost its impact due to lesser milk yield & people have started discardind it on roads, fends itself on garbage. Equally is the position of He calves which has lost their relevance due to Machine age.

“The cow is not merely an animal; rather, it is an abode of millions of gods and goddesses”.

Now the question is why should the cow be protected. It is a normal belief. Cow- worship means the worship of innocence and the protection of the weak and the helpless. It means brotherhood between all of god's wonderful creatures. It is a noble sentiment and must grow in every human heart. It is the core fact of Hinduism.

Cow protection is one of the most wonderful phenomena in human evolution. It means the entire subhuman world. Man, through the cow, is enjoined to realize his dignity with all that she lives.
Gau mata gives us milk whole life without any difference of cast , creed and religion .

Many products of cow milk like butter , ghee , cheese , butter milk etc are also very good for our health . Whole life we drink only cow Milk we will be free from many dangerous diseases .

Serve Gau mata with full dedication and devotion . If you can not keep Gau Mata at home . Save some money every month and give to any gau shala

It is written in our Shastras that after death we have to cross Baiterni River by holding the tail of Gaumata or we can say that without the help of Gaumata we can not cross Baiterni River .
So in our life time we should feed at least one cow for whole life time


If we will serve Gaumata we will get her blessings during our life time and after death also !!!!!
Save Gaumata !!!! Save Dharm !!!! Save Country !!!!


  • कभी नहीं होगा कैंसर
    देसी गाय की पीठ पर मोटा सा हम्प होता है ! जिसमे सूर्यकेतु नाड़ी होती हैं, जो सूर्य की किरणों के संपर्क में आते ही अपने दूध में स्वर्ण का प्रभाव छोड़ती हैं। जिस कारण गाय के दूध में स्वर्ण तत्व समा जाते हैं। देसी गाय का दूध पीने से कभी भी कैंसर का रोग नहीं होगा।
    गाय का दूध गुणों का भण्डार हैं, इस दूध से अनेक बीमारिया सही होती हैं
    और मातृत्व भाव होता हैं। आज हम जानेंगे के दूध के ऐसे अनजाने गुण जो हमने कभी सुने ही नहीं थे और जिन वजहों से ये अमृत तुल्य हैं।जीवन भर गाय का दूध पीने वाले व्यक्ति कैंसर जैसे भयानक रोगो से बचे रहते हैं। इसका दूध निरंतर सेवन करने से हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति इतनी बढ़ जाती हैं के कोई रोग नज़दीक नहीं फटकता। चाहे वो सर्दी खांसी हो, हृदय रोग हो, पेट के रोग, पुरुषो के रोग हो या स्त्रियों के रोग हो।गाय के दूध में सोना :भारतीय नस्ल की गाय की रीढ़ की हड्डी में सूर्यकेतु नाड़ी होती हैं। सूर्य की किरणे जब गाय के शरीर को छूती हैं, तब सूर्यकेतु नाड़ी सूर्य की किरणों से सोना बनाती हैं। इसी कारण गाय के दूध और मक्खन में पीलापन होता हैं, गाय के दूध में विषनाशक तत्व होते हैं। गाय का दूध पीने से शुद्ध सोना शरीर में जाता हैं। दूध में मौजूद प्रोटीन “केसीन” की वजह से इसका रंग सफ़ेद होता हैं। दूध में सबसे पौष्टिक तत्व हैं कैल्शियम और विटामिन डी। कैल्शियम हमारी हड्डियों और दाँतो को मज़बूत बनाता हैं और विटामिन डी कैल्शियम को सोखने में मदद करता हैं।दूध कैसा पीना चाहिए को अधिक देर तक गर्म नहीं करना चाहिए। पतले लोगो को मलाईदार दूध और मोटे लोगो को मक्खन निकला हुआ दूध पीना चाहिए। गाय का आधा किलो दूध अपने विशेष गुणों के कारण 250 ग्राम मांस और तीन अन्डो से अधिक मूल्यवान हैं। दूध पूर्ण भोजन हैं। इसमें सभी प्रकार के जीवनोपयोगी पदार्थ होते हैं।दूध पीने का समय :अक्सर लोग दूध रात में पीते हैं, मगर दूध पीने का सब से बढ़िया समय सुबह हैं। दूध का सही पाचन सूर्य की गर्मी से ही होता हैं। कोशिश करे रात की बजाये दूध सुबह ही पिए। और रात को भी पीना हो तो सोने से कम से कम तीन घंटे पहले पिए।*धारोष्ण दूध के फायदे* :धारोष्ण दूध मतलब ताज़ा निकला हुआ, छानकर, बिना गर्म किया हुआ मिश्री या शहद, भिगोई हुयी किशमिश का पानी मिलाकर 40 दिन में वीर्य शुद्ध होता हैं। नेत्रज्योति, स्मरण शक्ति बढ़ती हैं। खुजली, स्नायु दौर्बल्य, बच्चो का सूखा रोग, क्षय रोग(टी बी) हिस्टीरिया, हृदय की धड़कन आदि में उपयोगी हैं। यह छोटे छोटे बालको के लिए बहुत फायदेमंद हैं।ज़्यादा उबालने से होते हैं पोषक तत्व नष्ट।दूध हमेशा ताज़ा धारोष्ण ही पीना चाहिए, यदि ये संभव ना हो तो दूध गर्म कर के पिए, दूध को ज़्यादा नहीं उबालना चाहिए,* *अधिक उबालने से दूध में ज़रूरी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। दूध को उलट पुलट कर के झाग बना कर पीना चाहिए, ये झाग बहुत लाभदायक होता हैं।चीनी मिलाने के नुकसान :दूध में चीनी नहीं मिलनी चाहिए। चीनी मिलाने से दूध में मौजूद कैल्शियम नष्ट हो जाता हैं। दूध में प्राकृतिक मिठास होती हैं, थोड़े दिन बिना चीनी का दूध पिएंगे तो आपको दूध की प्राकृतिक मिठास आने लगेगी। अगर मीठा मिलाना हो तो आप फ्लो का रस, मुनक्का को भिगो कर इसका पानी, ग्लूकोस, गन्ने का रस मिला सकते हैं। बुरा खांड या मिश्री मिला हुआ दूध वीर्यवर्धक और त्रिदोष नाशक होता हैं।जिनको दूध पचता ना हो :जिन लोगो को दूध पचता नहीं वो लोग दूध में एक पीपल या शहद डाल कर पिए, इस से वायु नहीं बनेगी। दूध शीघ्र पचेगा, दूध अगर बादी करता हो तो अदरक के टुकड़े या सौंठ का चूर्ण और किशमिश मिलकर सेवन करे।किन रोगो में दूध नहीं पीना चाहिए :खांसी, दमा, दस्त, पेचिश, पेट दर्द और अपच आदि रोगो में दूध नहीं पीना चाहिए। इन रोगो में ताज़ा छाछ (मट्ठा) पीना चाहिए। घी भी इन रोगो में नहीं लेना चाहिए।आयुर्वेद में अगर दूध कहा जाए तो इसको भारतीय गाय का दूध ही समझना चाहिए।* अगर कोई दूसरे जीव का दूध हो तो वो विशेष रूप से बताया जाता हैं जैसे भैंस का दूध, बकरी का दूध इत्यादि।दूध में अनेको खनिज और पौषक तत्व :वैज्ञानिकों के अनुसार गाय के दूध में 8 प्रकार के प्रोटीन, 6 प्रकार के विटामिन, 21 प्रकार के एमिनो एसिड, 11 प्रकार के चर्बीयुक्त एसिड, 25 प्रकार के खनिज तत्त्व, 16 प्रकार के नाइट्रोजन यौगिक, 4 प्रकार के फास्फोरस यौगिक, 2 प्रकार की शर्करा, इसके अलावा मुख्य खनिज सोना, ताँबा, लोहा, कैल्शियम, आयोडीन, फ्लोरिन, सिलिकॉन आदि भी पाये जाते हैं। इन सब तत्त्वों के विद्यमान होने से गाय का दूध एक उत्कृष्ट प्रकार का रसायन (टॉनिक) है, जो शरीर में पहुँचकर रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और वीर्य को समुचित मात्रा में बढ़ाता है। यह पित्तशामक, बुद्धिवर्धक और सात्त्विकता को बढ़ाने वाला है। *गाय के दूध से 1 ग्राम भी कोलोस्ट्रोल नहीं बढ़ता।ज़हर भी समा लेती हैं गाय :यदि गाय कोई विषैला पदार्थ खा जाती है तो उसका प्रभाव उसके दूध में नहीं आता। गाय के शरीर में सामान्य विषों को पचाने की अदभुत क्षमता है। ये ज़हर देसी गाय के गले के नीचे लटकने वाले मांस में ही रह जाता हैं। एक शोध किया गया जिस में हर रोज़ देसी गाय को और अमेरिकन गाय को भोजन में थोड़ा थोड़ा ज़हर दिया गया , और जब उनका दूध निकाला गया तो देशी गाय के दूध में कोई भी ज़हरीला तत्व नहीं मिला और अमेरिकन गाय में वही ज़हर पाया गया जो उसको खिलाया गया।अनेक बीमारियो में हैं इसके फायदे :• गाय का दूध, जीर्णज्वर, मानसि क रोगों, मूर्च्छा, भ्रम, संग्रहणी, पांडुरोग, दाह, तृषा, हृदयरोग, शूल, गुल्म, रक्तपित्त, योनिरोग आदि में श्रेष्ठ है।• *गाय को शतावरी खिलाकर उस गाय के दूध पर मरीज को रखने से क्षय रोग (T.B.) मिटता है।*• कारनेल विश्वविद्यालय के पशुविज्ञान के विशेषज्ञ प्रोफेसर रोनाल्ड गोरायटे कहते हैं कि गाय के दूध से प्राप्त होने वाले MDGI प्रोटीन के कारण शरीर की कोशिकाएँ कैंसरयुक्त होने से बचती हैं।• *गाय के दूध से कोलेस्टरोल नहीं बढ़ता बल्कि हृदय एवं रक्त की धमनियों के संकोचन का निवारण होता है। इस दूध में दूध की अपेक्षा आधा पानी डालकर, पानी जल जाये तब तक उबालकर पीने से कच्चे दूध की अपेक्षा पचने में अधिक हल्का होता है।*• *गाय के दूध में उसी गाय का घी मिलाकर पीने से और गाय के घी से बने हुए हलुए को, सहन हो सके उतने गर्म-गर्म कोड़े जीभ पर फटकारने से कैंसर मिटने की बात जानने में आयी है।*• गाय के दूध में दैवी तत्त्वों का निवास है।गाय के दूध में अधिक से अधिक तेज तत्व एवं कम से कम पृथ्वी तत्व होने के कारण व्यक्ति प्रतिभा सम्पन्न होता है और उसकी ग्रहण शक्ति (Grasping Power) खिलती है। ओज-तेज बढ़ता है। इस दूध में विद्यमान ‘सेरीब्रोसाडस’ तत्व दिमाग एवं बुद्धि के विकास में सहायक है।• रेडियोधर्मी विकिरणों के प्रभाव को भी कर देती हैं नष्ट। केवल गाय के दूध में ही Stronitan तत्व है जो कि अणुविकिरणों का प्रतिरोधक है। Russian वैज्ञानिक (प्रसिद्ध वैज्ञानिक शिरोविच) गाय के घी-दूध को एटम बम के अणु कणों के विष का शमन करने वाला मानते हैं और उसमें रासायनिक तत्व नहीं के बराबर होने के कारण उसके अधिक मात्रा में पीने से भी कोई ‘साइड इफेक्ट’ या नुकसान नहीं होता।• तुरंत शक्ति देना वाला हैं इसका दूध।प्रतिदिन गाय के दूध के सेवन से तमाम प्रकार के रोग एवं वृद्धावस्था नष्ट होती है। उससे शरीर में तत्काल वीर्य उत्पन्न होता है।• एलोपैथी दवाओं, रासायनिक खादों, प्रदूषण आदि के कारण हवा, पानी एवं आहार के द्वारा शरीर में जो विष एकत्रित होता है उसको नष्ट करने की शक्ति गाय के दूध में है।

  • गाय के बारे में विभिन्न महापुरूषो के वचन


    • प्रसिद् मुस्लिम संत रसखान के अनुसार “यदि पशु के रूप में मेरा जन्म हो तो मैं बाबा नंद की गायों के बीच में जन्म लूं”

  • • पं. मदन मोहन मालवीय जी की अंतिम इच्छा “भारतीय संविधान में सबसे पहली धारा सम्पूर्ण गौवंश हत्या निषेध की बने”

  • ईसा मसीह “एक गाय को मरना, एक मनुष्य को मारने के समान है”
  • पंडित मदन मोहन मालवीय के अनुसार “यदि हम गायों की रक्षा करेंगे तो गाय हमारी रक्षा करेंगी”

  • स्कन्द पुराण अनुसार “गौ सर्वदेवमयी और वेद सर्वगौमय है”

  • महर्षि अरविंद के अनुसार “गौ’ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष


(ऋग्वेद ८/१०१/१५)

अनादिकाल से मानवजाति गोमाता की सेवा कर अपने जीवन को सुखी, सम्रद्ध, निरोग, ऐश्वर्यवान एवंसौभाग्यशाली बनाती चली आ रही है एवं. गोमाता की सेवा के माहात्म्य से शास्त्र भरे पड़े है. आईये शास्त्रों की गो महिमा की कुछ झलकिय देखे -

  • गौ को घास खिलाना कितना पुण्यदायी तीर्थ स्थानों में जाकर स्नान दान से जो पुन्य प्राप्त होता है,
  • ब्राह्मणों को भोजन कराने से जिस पुन्य की प्राप्ति होती है,
  • सम्पूर्ण व्रत-उपवास, तपस्या, महादान तथा हरी की आराधना करने पर जो पुन्य प्राप्त होता है,
  • सम्पूर्ण प्रथ्वी की परिक्रमा, सम्पूर्ण वेदों के पढने तथा समस्त सम्पूर्ण वेदों के पढने तथा समस्त
  • गौ सेवा से वरदान की प्राप्ति जो पुरुष गौओ की सेवा और सब प्रकार से उनका अनुगमन करता है, उस पर संतुष्ट होकर गौए उसे अत्यंत दुर्लभ वर प्रदान करती है.
  • गौ सेवा से मनोकामनाओ की पूर्ती
  • गौ की सेवा याने गाय को चारा डालना, पानी पिलाना, गाय की पीठ सहलाना, रोगी गाय का ईलाज करवाना आदि करनेवाले मनुष्य पुत्र, धन, विद्या, सुख आदि जिस-जिस वस्तु की ईच्छा करता है, वे सब उसे प्राप्त हो जाती है, उसके लिए कोई भी वस्तु दुर्लभ नहीं होती.
  • भगवान् शिव कहते है-हे पार्वती! सम्पूर्ण गौए जगत में श्रेष्ठ है. वे लोगो को जीविका देने के कार्य में प्रवृत हुई है. वे मेरे अधीन है और चन्द्रमा के अमृतमय द्रव से प्रकट हुई है.
  • वे सौम्य, पुन्मयी, कामनाओं की पूर्ती करने वाली तथा प्राणदायिनी है. इसलिए पुन्य प्राप्ति की इच्छा वालो को सदैव गायो की पूजा, सेवा (घास आदि खिलाना , पानी पिलाना, रोगी गाय का ईलाज कराना आदि-आदि) करनी चाहिए.
  • भूमि दोष समाप्त होते है गौओ का समुदाय जहा बैठकर निर्भयतापूर्वक साँस लेता है, उस स्थान की शोभा को बाधा देता है और वह के सारे पापो को खीच लेता है.
  • सबसे बड़ा तीर्थ गौ सेवा देवराज इंद्र कहते है- गौओ में सभी तीर्थ निवास करते है. जो मनुष्य गाय की पीठ छोटा है और उसकी पूछ को नमस्कार करता है वह मानो तीर्थो में तीन दिनों तक उपवास पूर्वक रहकर स्नान कर देता है.
  • असार संसार छेह सार पदार्थ भवान विष्णु, एकादशी व्रत, गंगानदी, तुलसी, ब्रह्मण और गौए - ये ६ इस दुर्गम असार संसार से मुक्ति दिलाने वाले है.
  • मंगल होगा जिसके घर बछड़े सहित एक भी गाय होती है, उसके समस्त पाप्नाष्ट हो जाते है और उसका मंगल होता है.
  • जिसके घर में एक भी गौ दूध देने वाले न हो उसका मंगल कैसे हो सकता है और उसके अमंगल का नाश कैसे हो सकता है.
  • ऐसा न करे गौओ, ब्राह्मणों तथा रोगियों को जब कुछ दिया जाता है उस समय जो न देने की सलाह देते है. वे मरकर प्रेत बनते है. गोपूजा -
  • विष्णुपूजा भगवान् विष्णु देवराज इन्द्र से कहते है के हे देवराज! जो मनुष्य अश्वत्थ वृक्ष, गोरोचन और गौ की सदा पूजा सेवा करता है, उसके द्वारा देवताओं, असुरो और मनुष्यों सहित सम्पूर्ण जगत की भी पूजा हो जाते है. उस रूप में उसके द्वारा की हुई पूजा को मई यथार्थ रूप से अपनी पूजा मानकर ग्रहण करता हूँ. गोधूली महान पापो की नाशक है. गायो के खुरो से उठी हुई धूलि, धान्यो की धूलि तथा पुट के शरीर में लगी धूलि अत्यंत पवित्र एवं महापापो का नाश करने वाले है.
  • चारो सामान है नित्य भागवत का पाठ करना, भगवान् का चिंतन, तुलसी को सीचना और गौ की सेवा करना ये चारो सामान है
  • गो सेवा के चमत्कार गौओ के दर्शन, पूजन, नमस्कार, परिक्रमा, गाय को सहलाने, गोग्रास देने तथा जल पिलाने आदि सेवा के द्वारा मनुष्य दुर्लभ सिधिया प्राप्त होती है. गो सेवा से मनुष्य की मनोकामनाए जल्द ही पूरी हो जाती है. गाय के शरीर में सभी देवी-देवता, ऋषि मुनि, गंगा आदि सभी नदिया तथा तीर्थ निवास करते है. इसीलिये गोसेवा से सभी की सेवा का फल मिल जाता है.
  • गो को प्रणाम करने से - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारो की प्राप्ति होती है. अतः सुख की इच्छा रखने वाले बुद्धिमान पुरुष को गायो को निरंतर प्रणाम करना चाहिए.
  • ऋषियों ने सर्वश्रेष्ठ और सर्वप्रथम किया जाने वाला धर्म गोसेवा को ही बताया है.
  • प्रातःकाल सर्वप्रथम गाय का दर्शन करने से जेवण उन्नत होता है.
  • यात्रा पर जाने से पहले गाय का दर्शन करके जाने से यात्रा मंगलमय होती है.
  • जिस स्थान पर गाये रहती है, उससे काफी दूरतक का वातावरण शुद्ध एवं पवित्र हो है, अतः गोपालन करना चाहिए.
  • भगवान् विष्णु भी गोसेवा से सर्वाधिक प्रसन्न होते है, गोसेवा करनेवाले कोअनायास ही गोलोक की प्राप्ति हो जाती है. प्रातःकाल स्नान के पश्चात अर्व्प्रथम गाय का स्पर्श करने से पाप नष्ट होते है.
  • गोदुग्ध - धरती का अमृत गाय का दूश धरती का अमृत है. विश्व में गोद्म्ग्ध के सामान पौष्टिक आहार दूसरा कोई नहीं है. गाय के दूध को पूर्ण आहार माना गया है. यह रोगनिवारक भी है. गाय के दूध का कोई विकल्प नहीं है. यह एक दिव्य पदार्थ है.
  • वैसे भी गाय के दूध का सेवन करना गोमाता की महान सेवा करना ही है. क्योकि इससे गोपालन को बढ़ावा मिलता है और अप्रत्यक्ष रूप से गाय की रक्षा ही होती है. गाय के दूध का सेवन कर गोमाता की रक्षा में योगदान तो सभी दे ही सकते है.
  • पंचगव्य गाय के दूध, दही, घी, गोबर रस, गो- मूत्र का एक निश्चित अनुपात में मिश्रण पंचगव्य कहलाता है. पंचगव्य का सेवन करने से मनुष्य के समस्त पाप उसी प्रकार भस्म हो जाते है, जैसे जलती आग से लकड़ी भस्म हो जाते है. मानव शरीर ऐसा कोई रोग नहीं है, जिसका पंचगव्य से उपचार नहीं हो सकता. पंचगव्य से पापजनित रोग भी नष्ट हो जाते है. यदि गो-दुग्ध सेवन के प्रचार को अधिक महत्त्व दिया जाय तो गोवध तो अपने आप ही धीरे-धीरे बंद हो —
  • गौ माता जीस जगह खडी रहकर आनंद पुर्वक चैन की सांस लेती है। वहा वास्तु दोष समाप्त हो जाते है।
  • गौ माता मे तैतीस कोटी देवी देवताओं का वास है। गौ माता जीस जगह खुशी से रभांने से देवी देवता पुष्प वर्षा करते है।
  • गौ माता के गले मे घंटी जरूर बांधे गाय के गले मे घंटी बजने से गौ आरती होती है।
  • जो व्यक्ति गौ माता की सेवा पुजा करता है। उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गौ माता हर लेती है।
  • गौ माता के खुर्र मे नागदेवता का वास होता है। जहा गौ माता विचरण करती है। उस जगह साप बिच्छू नही आते है।
  • गौ माता के गोबर मे लक्ष्मी जी का वास होता है
  • गौ माता के मुत्र मे गंगाजी का वास होता है।
  • गौ माता के गोबर से बने उपलो का रोजाना घर दुकान मंदिर परिसरो पर धुप करने से वातावरण शुद्ध होता सकारात्मक ऊर्जा मिलती है
  • गौ माता के ऐक आख मे सुर्य व दुसरी आख मे चन्द्र देव का वास होता है। गाय इस धरती पर साक्षात देवता है।
  • गौ माता अन्नपूर्णा देवी है कामधेनु है।
  • मनोकामना पूर्ण करने वाली है।
  • गौ माता के दुध मे सुवर्ण तत्व पाया जाता है जो रोगो की क्षमता को कम करता है।
  • गौ माता की पुछ मे हनुमानजी का वास होता है। कीसी व्यक्ति को बुरी नजर हो जाये तो गौ माता की पुछ से झाडा लगाने से नजर उतर जाती है।
  • गौ माता की पीठ पर ऐक उभरा हुआ कुबंड होता है। उस कुबंड मे सुर्य केतु नाडी होती है। रोजाना सुबह आधा घंटा गौ माता की कुबंड हाथ फेरने से रोगो का नाश होता है
  • गौ माता का दुध अमृत है गौ माता धर्म की धुरी है। गौ माता के बिना धर्म कि कलपना नही कि जा सकती गौ माता जगत जननी है। गौ माता पृथ्वी का रूप है गौ माता सर्वो देवमयी सर्वोवेदमयी है।
  • गौ माता के बिना देवो वेदो की पुजा अधुरी है। ऐक गौ माता को चारा खिलाने से तैतीस कोटी देवीदेवताओ को भोग लग जाता है।
  • गौ माता से ही मनुष्यो के गौत्र की स्थापना हुई है।
  • गौ माता चौदह रत्नो मे ऐक रत्न है।
  • गौ माता साक्षात मा भवानी का रूप है।
  • गौ माता के पंचगव्य के बिना पुजा पाठ हवन सफल नही होते है।
  • गौ माता के दुध घी मख्खन दही गोबर गोमुत्र से बने पंचगव्य हजारो रोगो की दवा है। इसके सेवन से असाध्य रोग मीट जाते है
  • गौ माता को घर पर रखकर सेवा करने वाला सुखी आध्यात्मिक जीवन जीता है। उनकी अकाल मृत्यु नही होती है।
  • तन मन धन से जो मनुष्य गौ सेवा करता है। वो वैतरणी गौ माता की पुछ पकड कर पार करता है। उन्हें गौलोकधाम मे वास मीलता है
  • गौ माता के गोबर से इधंन तैयार होता है। गौ माता सभी देवी देवताओं मनुष्यो की आराध्य है इष्ट देव है।
  • साकेत स्वर्ग इन्द्र लोक से भी उच्चा गौ लोक धाम है। गौ माता के बिना संसार की रचना अधुरी है।
  • गौ माता मे दिव्य शक्तिया होने से संसार का संतुलन बना रहता है।
  • गाय माता के गौवंशो से भुमी को जोत कर की गई खेती सर्वश्रेष्ट खेती होती है
  • गौ माता जीवन भर दुध पिलाने वाली माता है।
  • गौ माता को जननी से भी उच्चा दर्जा दिया गया है।
  • जंहा गौ माता निवास करती है। वह स्थान तिर्थ धाम बन जाता है।
  • गौ माता कि सेवा परिक्रमा करने से सभी तिर्थो के पुण्यो का लाभ मीलता है।
  • जीस व्यक्ति के भाग्य की रेखा सोई हुई हो तो वो व्यक्ति अपनी हथेली मे गुड को रखकर गौ माता को जीभ से चटाये गौ माता की जीभ हथेली पर रखे गुड को चाटने से व्यक्ति की सोई हुई भाग्य रेखा खुल जाती है।
  • गौ माता के चारो चरणो के बीच से निकल कर परिक्रमा करने से इंसान भय मुक्त हो जाता है। गाय माता आनंद पुर्वक सासें लेती है । छोडती है। वहा से नकारात्मक ऊर्जा भाग जाती है। सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। वातावरण शुद्ध होता है
  • गौ माता के गर्भ से ही महान विद्वान धर्म रक्षक गौ कर्ण जी महाराज पैदा हुए थे गौ माता की सेवा के लिए ही इस धरा पर देवी देवताओं ने अवतार लीये है।
  • जब गौ माता बछडे को जन्म देती तब पहला दुध बांज स्त्री को पिलाने से उनका बांजपन मीट जाता है।
  • स्वस्थ गौ माता का गौ मुत्र को रोजाना दो तोला सात पट कपडे मे छानकर सेवन करने से सारे रोग मीट जाते है
  • गौ माता वात्सल्य भरी निगाहों से जीसे भी देखती है। उनके उपर गौकृपा हो जाती है
  • गाय इस संसार का प्राण है।
  • काली गाय की पुजा करने से नोह ग्रह शांत रहते है।
  • जो मन पुर्वक धर्म के साथ गौ पुजन करता है। उनको शत्रु दोषो से छुटकारा मीलता है।
  • गाय धार्मिक आर्थिक व सांस्कृतिक आध्यात्मिक दृष्टि से सर्वगुण संपन्न है। गाय ऐक चलता फीरता मंदिर है।
  • हमारे सनातन धर्म में तैतिस कोटी देवी देवता है। हम रोजाना तैतीस कोटी देवी देवताओं के मंदिर जा कर उनके दर्शन नही कर सकते पर गौ माता के दर्शन से सभी देवी देवताओं के दर्शन हो जाते है।
  • कोई भी शुभ कार्य अटका हुआ हो बार बार प्रयत्न करने पर भी सफन नही हो रहा हो तो गौ माता के कान मे कहीये रूका हुआ काम बन जायेगा
  • जो व्यक्ति मोक्ष गौ लोक धाम चाहता हो उसे गौ व्रती बनना चाहिए ।
  • गौ माता सर्व सुखों की दातार है। मैं प्रत्येक बुध्दिमान् मनुष्य को कह रहा हूँ कि यह गाय रूद्र की माँ हैं, वसु की बेटी है तथा आदित्य की बहन के समान हैं | यह गाय दूध, दही, घी, मक्खन रूप अमृत का खजाना है | इसलिए इस निरपराध, मारने के अयोग्य गाय को तू मत मार ||
वैदिक विधान (ऋग्वेद ८/१०१/१५)






JAI SHREE KRISHNA
JAI GAUMATA JI KI