GAUSEWA.ORG
ऋषियों ने सर्वश्रेष्ठ और सर्वप्रथम किया जाने वाला धर्म गोसेवा को ही बताया है.

Home » GAUDARSHAN

GAUDARSHAN

गोमूत्रं गोमयं दुन्धं गोधूलिं गोष्ठगोष्पदम्।

पक्कसस्यान्वितं क्षेत्रं द्ष्टा पुण्यं लभेद् ध्रुवम्।।

 

इसका मतलब हैं “गोमूत्र, गोबर, गोदुग्ध, गोधूली, गोशाला, गोखुर और पके हुए हरे-भरे खेत नजर भर देख लेने से पुण्य की प्राप्ति होती है।”

 

 

1) गोमूत्र:

 गोमूत्र को बहुत ही पवित्र माना गया हैं| हमारे शास्त्रों के अनुसार गोमूत्र को गंगा जल के जितना पवित्र माना जाता हैं| क्योंकि हमारे शस्त्रों मे बताया गया है की गोमूत्र मे माँ गंगा का वश होता हैं| गोमूत्र को हम आयुर्वेदा मे औषधी के रूप मे उपयोग करते हैं| गोमूत्र का सेवन करने से बहुत सारी बीमारियाँ दूर हो जाती हैं| और अगर मनुष्य गोमूत्र का सिर्फ़ दर्शन कर ले तो गरुड़ पुराण के अनुसार उस मनुष्य को पुण्य और लाभ दोनों के फल की प्राप्ति होती हैं|

 

 

2) गोबर:

गाय हिंदू धर्म मे माता के नाम से पुकारी जाती हैं और पूजी जाती हैं| क्योंकि हमारे शस्त्रों मे गाय को भगवान के समान माना गया है|  ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार गौ माता के पैरों में समस्त तीर्थ व गोबर में साक्षात माता लक्ष्मी का वास माना जाता है। इसलिए गाय के गोबर का भी बहुत महत्व हैं| कभी भी किसी भी स्थान को पवित्र करने के लिए हम गाय के गोबर का उपयोग करते हैं| सबसे ज़्यादा गाय के गोबर का प्रयोग हम किसी पूजा स्थल या शादी के मंडप मे करते हैं ताकि वो जगह पवित्र हो जाए| इसलिए मन में श्रद्धा रखकर गाय के गोबर को देखने से ही पुण्य की प्राप्ति हो जाती है।

 

 

3) गोशाला:

 जहां बहुत सारी गाय संयुक्त रूप से रहती हैं उस स्थान को गौशाला कहा जाता है। गोशाला को भी मंदिर के समान पवित्र और पूजनीय माना जाता हैं| इसलिए जो मनुष्य प्रतिदिन गोशाला जाकर गायों की सेवा करते हैं उसे भगवान श्री कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता हैं और उसे भगवान श्रीकृष्ण के धाम गोलोक की प्राप्ति भी होती हैं| और अगर किसी कारण वश कोई मनुष्य गोशाला मे सेवा ना कर पता हैं तो रोजाना गौशाला को मंदिर समान भाव से दर्शन और नमन करने से भी मनुष्य को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

 

 

4) पकी हुई खेती:

खुली जमीन पर चारों ओर फैले हरे-भरे खेत अपनी अलग ही अद्भुत छटा बिखेरते हैं। जिसको कोई भी देखे तो उसके मन को एक अलग तरह की शांति मिलती हैं| फ़सल से हरी-भारी भूमि को देखकर लगता हैं मानो किसी जन्नत मे आ गये हैं क्योंकि इससे इसकी सुंदरता बहुत निखर जाती हैं| गरुड़ पुराण के अनुसार, उन्हें देखने से जहां सुकुन की प्राप्ति होती है वहीं साथ-साथ पुण्य की भी प्राप्ति होती है।

 

 

5) गोदुग्ध:

 हमे पता है की गाय के दूध के बहुत सारे फायदे हैं| इसका प्रयोग भी कई प्रकार के भीमरियों के दवा को बनाने मे किया जाता हैं| हमारे पुराने युगों से लेकर आज तक गाय के दूध को अमृत के समान समझा जाता हैं| इसलिए जो भी मनुष्य गाय को दूध देते हुए देख ले तो उसे निश्चित ही शुभ फल के साथ-साथ पुण्य की भी प्राप्ति होती हैं|

 

 

6) गौधूली:

 कई बार हमने देखा है की गाय अपने पैरों से ज़मीन को खुरचती हैं| और जब गाय अपने पैरों से जमीन खुरचती है तो उस वक्त जो धूल उड़ती है उसे गोधूली कहा जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार गाय के द्वारा खुरेची हुई ज़मीन से निकली हुई धूल पावन होती है उसे देखने मात्र से ही मनुष्य पुण्य का भागी बन जाता है।

 

 

7) गोखुर:

 जब गाय अपने पैर के नीचे से जमीन खुरचती है उस प्रक्रिया को गोखुर कहा जाता है। हमारे शास्त्रों के अनुसार गाय के पैरों मे तीर्थ स्थान का वास होता हैं| इसलिए गौ माता के पैरों में लगी हुई मिट्टी को जो व्यक्ति नित्य दिन तिलक लगाता है, उसे किसी भी तीर्थ में जाने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि उसे सारे तीर्थों मे जाने का फल एक जगह से ही मिल जाता हैं| और अगर उनके पैरों के दर्शन भी हो जाएँ तो भी मनुष्य को पुण्य और लाभ दोनों का फल मिलता हैं|