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MILK TESTER


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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मेक इन इंडिया मुहिम अब रंग दिखाने लगी है। इसी के तहत कस्बे में स्थित केन्द्रीय इलेक्ट्रोनिकी अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीरी) के वैज्ञानिकों ने ऐसी मशीन बनाई जिससे दूध में पानी समेत विभिन्न प्रकार के हानिकारक तत्वों की जानकारी चंद सेकंड में पता चल जाएगी।
इस विकसित हाईस्पीड मशीन का नाम क्षीर टेस्टर है। आम आदमी तक पहुंचाने के लिए शनिवार को इस मशीन की तकनीक गुजरात की एक कंपनी को ट्रांसफर किया जाएगा। सुबह संस्थान में आयोजित होने वाले समारोह में सीरी के निदेशक प्रो.आरके सिन्हा, संस्थान के पूर्व निदेशक डा. चन्द्रशेखर सहित वैज्ञानिक गुजरात के सूरत स्थित मैसर्स एल्पाइन टेक्नोलोजी प्रतिनिधियों के साथ अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर कर तकनीक का हस्तांतरण करेंगे। इसके बाद निजी कम्पनी बड़े पैमाने पर मशीन का उत्पादन कर आम लोगों तक पहुंचाएगी।
सटीक आंकड़े
आविष्कार करने वाली टीम प्रभारी तथा सीरी संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पीसी पंचारिया ने बताया कि देश में दूध की जांच के लिए अब तक विदेशी मशीन से काम लिया जा रहा था।    
क्षीर टेस्टर विदेशों में बनी मशीन के मुकाबलेे हल्की सस्ती एवं सटीक आंकड़े बताती है। क्षीर टेस्टर दूध जांच के सभी टेस्टों में सटीक पाई गई है।
दूध 70 फीसदी मिलावटी
 डॉ. पीसी पंचारिया ने बताया कि भारत सरकार के एफएसएसआई विभाग की ओर से पिछले दिनों घोषित आंकड़ों के अनुसार देश में 60 से 70 प्रतिशत दूध मिलावटी मिल रहा है। दूध कारोबारी मिलावट को छिपाने के लिए दूध में इस प्रकार के हानिकारक पदार्थ मिलाते हैं जिनका साधारण जांचों में पता नहीं चलता है। जैसे यूरिया, थोरियम, सोडा, कास्टिक सोडा, नमक, डिटर्जेंट पावडर, अमोनियम सल्फेट, हाइड्रोजन प्रोक्साइड आदि प्रमुख हैं।
मिलावट दूध से नुकसान
 वैज्ञानिक अनुसंधानों में मिली जानकारी के अनुसार इस प्रकार के दूध का सेवन करने वाला व्यक्ति में डायरिया, किडनी फैल होना, मनोरोग, गठिया सहित विभिन्न प्रकार के दर्द, रक्तचाप सहित कई प्रकार की बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है।
मशीन की दो कैटेगरी
विदेशी मशीन का दाम करीब 4 से 5 लाख रुपए है। सीरी ने क्षीर टेस्टर मशीन की दो कैटेगरी बनाई है। उद्योग में काम आनी वाली मशीन की कीमत 70 हजार से एक लाख रुपए के बीच है जबकि घरेलू उपयोग के लिए बनाई गई मशीन की कीमत दस हजार रुपए है।  विदेशी मशीन दूध की जांच में तीन मिनट का समय लेती है जबकि क्षीर टेस्टर मात्र 40 सेकंड में नतीजे दे देती है।
 मेक इन इंडिया के तहत संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम ने क्षीर स्कैनर तथा क्षीर टेस्टर का आविष्कार किया है। इसके औद्योगिक उत्पादन से देश के लोगों को लाभ होगा।
प्रो. आरके सिन्हा, निदेशक सीरी पिलानी
 विकसित उपकरण देश में अपने प्रकार का प्रथम उपकरण है। इससे से दूध में मिलावट का पता लगा कर इसके दुष्परिणामों से बचा जा सकेगा।
डॉ. पीसी पंचारिया, परियोजना प्रमुख एवं वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डिजिटल सिस्टम्स समूह, सीरी पिलानी