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ORGANIC FOOD VS NORMAL FOOD

***भोजन की थाली में किस तरह परोसा जाता है ज़हर***
.जैविक खेती अपनाओ, देश बचाओ
.
हाल ही में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि दो फीसदी खाने वाली चीज़ों में बतायी हुई सीमा से कई गुना अधिक पेस्टीसाइड का इस्तेमाल हो रहा हैं। अगर इतने घातक खाने की चीज़े हम खाने में शामिल करते है तो क्या हम सुरक्षित रह सकते हैं। आज हम आपको इसके बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे और साथ ही कैसे बचें,इसके बारे में बता रहे हैं।
पेस्टीसाइड पर एक रिपोर्ट-
डॉक्टर के अनुसार एक सेब रोज़ खाने का मतलब है कि बीमारियों से दूर रहनाष लेकिन अब किसी को ऐसा बोलने के लिए भी सोचा पड़ेगा। पिछले दिनों हुए एक अध्ययन में तमाम दूसरी चीज़ों के साथ सेब व संतरे में भी तय सीमा से 140 फीसदी अधिक पेस्टीसाइड पाया गया है। अजवाइन से लेकर चावल तक और केले से लेकर दूध तक में ज़रूरत से ज़्यादा पेस्टीसाइड पाए गए हैं। दुनियाभर में जो पेस्टीसाइड पर रोक है,उनका यूज़ भारत में धड़ल्ले से हो रहा है। पिछले साल जुलाई में बिहार के सारन जिले में जहरीला मिड डे मील खाने से 23 बच्चों की मौत हुई थी। इनके भोजन में मोनोक्रोटोफॉस नामक पेस्टीसाइड पाया गया था,जो कि कई देशों में प्रतिबंधित है। इसके अलावा किसानों को पेडिमेथलीन और ब्यूटाक्लोर जैसे पेस्टीसाइड यूज़ करने की सलाह दी जा रही है।
1-कितने है खतरनाक
खाने वाली चीज़ों के जरिए शरीर में पहुंचने वाले पेस्टीसाइड हमारे पेट में जमा हो जाते हैं, जहां से यह धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैलते हैं। इनसे कैंसर,अल्जाइमर,किडनी संबंधी रोग हो सकते हैं। पेस्टीसाइड हमारे नर्वस सिस्टम को भी कमजोर बनाते हैं। यदि आप एक नॉन ऑर्गेनिक सेब खा रहे हैं तो आपके शरीर में 30 तरह के पेस्टीसाइड्स जा रहे हैं। दूध,संतरा,गाजर,केला,अंगूर,खीरा,अजवाइन,चावल और गेहूं में अधिक मात्रा में पेस्टीसाइड डाले जाते हैं।
2-सरकार को क्या करना चाहिए?
-सरकार को चाहिए कि वह पेस्टीसाइड बनाने वाली कंपनियों पर कड़ी निगरानी करे और तय मात्रा में ही जहरीले तत्वों का उपयोग पेस्टीसाइड में होने दें। साथ ही किसानों के अनाज की
भी जांच करें।
-पेस्टीसाइड के उपयोग के बारे में किसानों के पास कोई जानकारी नहीं होती। सरकार को उनके उचित प्रशिक्षण का इंतजाम करना चाहिए।
-ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए इसे सब्सिडी दी जाना बहुत ज़रूरी है। अकसर किसान इसके मंहगे होने के कारण इससे कतराते हैं।
-सरकार को फर्टिलाइज़र पर दी जाने वाली सब्सिडी कम करना चाहिए,ताकि किसान इसका मोह छोड़कर ऑर्गेनिक खेती पर ध्यान दें।
-ऑर्गेनिक खेती को लेकर सरकार को उदारवादी रवैया अपनाना चाहिए। ऑर्गेनिक फूड के सर्टिफिकेट के लिए अभी किसानों को खासी मशक्कत करनी पड़ती हैं।
हमें क्या करना चाहिए?
-साग-सब्जी और फलों को अच्छी तरह धोकर उन्हें कुछ देर के लिए नमकयुक्त पानी में भिगो दें।
-सब्जियों को पोटेशियम परमैग्नेटयुक्त पानी से धोएं और फिर इन्हें दोबारा साफ पानी से अच्छी तरह धोएं।
-हमेशा सब्जियों को उनके छिलके निकालकर ही बनाएं।
-मिर्च,टमाटर,मूली,प्याज,अदरक,बैंगन और फल आदि खाने वाली चीज़ें घर पर ही उगाने की कोशिश करें। किचन गार्डनिंग करें।
-संभव हो तो बाजार से ऑर्गेनिक सब्जी और पल ही खरीदें।
FACTS-
1 - 1800 ऑर्गेनिक ऑपरेशन्स "ऑर्गेनिक क्रॉप इम्प्रूवमेंट एसोसिएशन" (ओसीआईए) द्वारा 11 देशों में चलाए जा रहे हैं। इनमें 233 सिर्फ चीन में चल रहे हैं।
2 - 30हजार टन हर साल पेस्टीसाइड भारत में इस्तेमाल होता है। भारत में साठ फीसदी से अधिक खाद्य पदार्थों में यह यूज होता है, जबकि दुनियाभर में 20 फीसदी खाद्यान्न में पेस्टीसाइड यूज
होता है।
3 - 20 हजार मौतें दुनियाभर में हर साल पेस्टीसाइडयुक्त भोजन से होती हैं। साथ ही दस लाख से अधिक बीमारियों के केस आते हैं।

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